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छोटे-छोटे फैसले लेने पर भी होने लगी है झुंझलाहट? डिसिजन फटीग हो सकता है कारण, पढ़ें बचाव के 5 तरीके

दिन भर के छोटे-बड़े फैसले लेने के कारण मेंटल एनर्जी खत्म होने लगती है, जिसके कारण चिड़चिड़ापन होता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक अनगिनत फैसले लेते हैं। नाश्ते में क्या खाना है, ऑफिस कौन से कपड़े पहनकर जाने हैं, किस ईमेल का जवाब पहले देना है और शाम को कौन सी वेब सीरीज देखनी है। ये सब छोटे-बड़े फैसले हमारी मेंटल एनर्जी खर्च करते हैं।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि दिन खत्म होते-होते आप इतने थक जाते हैं कि एक छोटा सा फैसला लेना भी पहाड़ जैसा लगने लगता है? इसी मानसिक अवस्था को डिसिजन फटीग कहा जाता है।

क्या है डिसिजन फटीग?

डिसिजन फटीग का मतलब है फैसले लेने की थकान। यानी एक व्यक्ति दिन भर में जितने ज्यादा फैसले लेता है, वह मानसिक और भावनात्मक रूप से उतना ज्यादा थका हुआ महसूस करता है। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति के लिए छोटे से छोटा फैसला लेना भी बहुत मुश्किल लगने लगता है।

इसके लक्षण कैसे होते हैं?

डिसिजन फटीग को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह शारीरिक थकान से अलग है, लेकिन इसके संकेत ऐसे हो सकते हैं-

  • टालमटोल करना- जब आप जरूरी फैसले लेने से बचने लगते हैं और उन्हें कल पर टाल देते हैं।
  • इम्पल्सिव फैसले- थकान के कारण आप बिना सोचे-समझे फैसले लेने लगते हैं, जैसे कि बेवजह की ऑनलाइन शॉपिंग करना या अनहेल्दी जंक फूड खा लेना।
  • चिड़चिड़ापन- जब कोई आपसे छोटा सा सवाल पूछता है, तो आप झुंझला जाते हैं।
  • मानसिक सुन्नता- ऑप्शन्स को देखकर कन्फ्यूज हो जाना और यह तय न कर पाना कि क्या सही है।

डिसिजन फटीग से बचने के लिए क्या करें?

  • अपने रूटीन को ऑटोपायलट पर डालें- आप सुबह नाश्ता क्या करेंगे, एक्सरसाइज कब करेंगे या आज कौन-से कपड़े पहनेंगे, ऐसे फैसलों को पहले ही सेट कर लें, ताकि रोज-रोज आपको इनके बारे में सोचना न पड़े।
  • सबसे जरूरी फैसले सुबह लें- हमारी मेंटल बैटरी सुबह सबसे ज्यादा चार्ज होती है। इसलिए, मुश्किल और जरूरी कामों या मीटिंग्स को दिन के पहले हिस्से में निपटाएं।
  • ऑप्शन को सीमित करें- ज्यादा विकल्प मतलब  ज्यादा थकान।  चाहे शॉपिंग हो या काम का तरीका, अपने ऑप्शन को कम से कम रखें। ज्यादा सोचकर आप फैसले लेने में अटक जाते हैं।
  • शाम को कोई बड़ा फैसला न लें- अगर आप थके हुए हैं, तो इंवेस्टमेंट, करियर या रिश्तों से जुड़े बड़े फैसले लेने से बचें। एक अच्छी नींद के बाद सुबह उस पर विचार करना ज्यादा सही होता है।
  • मील प्लानिंग- अगले दिन क्या खाना है, इसकी तैयारी एक रात पहले या वीकेंड पर कर लें। यह आपके रोज के 15-20 मिनट और बहुत सारी मेंटल एनर्जी बचाएगा।

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