अंतर्राष्ट्रीय

हॉर्मुज़ क्रॉसफायर, ‘डक डिप्लोमेसी’: BRICS बैठक में भारत का उच्च-दांव संतुलन

BRICS देशों की हालिया बैठक के दौरान क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक समीकरणों ने एक नई जटिलता पैदा कर दी है। विशेष रूप से, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के ब्लॉक में शामिल होने के बाद, यह समूह अब उन देशों का घर बन गया है जो क्षेत्रीय संघर्षों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इस परिदृश्य ने BRICS के अंदर राजनीतिक और आर्थिक सामंजस्य की चुनौतियां बढ़ा दी हैं, जिनका सामना भारत जैसे प्रमुख सदस्य को संतुलित कूटनीति के माध्यम से करना आवश्यक है।

हॉर्मुज़ जलसंधि, जो मध्य पूर्व और विश्व के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक है, अभी हाल ही में विभिन्न संघर्षों का केंद्र बनी हुई है। ईरान और यूएई के बीच तनाव ने इस जलसंधि की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं। भारत, जो BRICS का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, इस जटिल परिदृश्य में अपनी रणनीति को बहुत सावधानी से संचालित कर रहा है।

भारत की ‘डक डिप्लोमेसी’ यानी परिस्थिति के अनुसार समझौता और सामंजस्य बिठाने की नीति ने इसे इस उच्च-दांव खेल में एक मजबूत स्थान दिलाया है। BRICS के अंदर बढ़ते मतभेदों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बावजूद भारत ने सभी पक्षों के साथ संतुलित और सहयोगात्मक संबंध बनाए रखने पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और UAE जैसे देश जो पारंपरिक रूढ़ियों से हटकर BRICS समूह में शामिल हुए हैं, वह इस समूह के विस्तार और दीर्घकालिक रणनीतिक उद्देश्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, यह ठीक उसी समय है जब वैश्विक राजनीति में क्षेत्रीय संघर्ष तीव्र हो रहे हैं, जिससे कई आर्थिक और सुरक्षा संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो रही हैं।

भारत का BRICS मंच पर संवाद को प्राथमिकता देना और ‘‘डक डिप्लोमेसी’’ के जरिए विवादों को सुलझाने का प्रयास करना भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल आर्थिक साझेदारी मज़बूत होगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी एक स्थायी कूटनीतिक तंत्र विकसित होगा। भारत के इस संतुलित रुख से अन्य सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जो कि भूमंडलीय राजनीति में BRICS की भूमिका को अधिक प्रभावशाली बनाएगा।

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