अपराध

डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधों की जांच हेतु समिति गठित। -उच्च स्तरीय समिति में कई मंत्रालय, एजेंसियां शामिल -पीड़ितों के मुआवजे, हेल्पलाइन पुनर्गठन पर विचार।

गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया है। यह समिति विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में काम करेगी, जिसका उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों की चुनौतियों का समाधान करना और सुधारात्मक उपाय सुझाना है। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं, जो पीड़ितों के मुआवजे और हेल्पलाइन के पुनर्गठन पर भी विचार करेंगे।

गृह मंत्रालय ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध है जिसमें साइबर ठग नकली पुलिस, सरकारी एजेंसियों के अधिकारी, वकील-जज बनकर पीडि़तों को आडियो और वीडियो काल के माध्यम से डराते हैं और लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये हड़प लेते हैं।

पिछले वर्ष दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को डिजिटल अरेस्ट के मामलों की एकीकृत राष्ट्रव्यापी जांच करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश हरियाणा के बुजुर्ग दंपति की शिकायत पर स्वत: संज्ञान मामले में पारित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगे थे विचार

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध मामलों से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय समेत विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के विचार भी मांगे थे। गृह मंत्रालय ने बताया कि विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालय समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य अरेस्ट गिरफ्तारी मामलों की व्यापक जांच करना है।

समिति को कानून को क्रियान्वित करने वाली एजेंसियों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं की पड़ताल करने, अमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) की सिफारिशों और अदालत के निर्देशों पर विचार करने, संबंधित कानूनों, नियमों, सर्कुलरों, और कार्यान्वयन में कमी की पहचान करने, सुधारात्मक उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है।

समिति के सदस्यों में इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवाओं के विभाग, कानून और न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ), सीबीआइ, एनआइए, दिल्ली पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (आइ4सी) के अधिकारी शामिल हैं। आइ4सी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समिति के सदस्य-सचिव होंगे। समिति हर दो सप्ताह में बैठक करेगी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को हो सकती है।

29 दिसंबर को हुई थी समिति की पहली बैठक

गृह मंत्रालय ने बताया कि समिति की पहली बैठक 29 दिसंबर को हुई, जब सीबीआइ ने मामलों के लिए मौद्रिक सीमा रखने का सुझाव दिया। इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बैठक के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रविधान के तहत निर्णय तंत्र को मजबूत की आवश्यकता पर जोर दिया।

दूरसंचार विभाग ने सूचित किया कि दूरसंचार अधिनियम के तहत मसौदा नियमों के अधिसूचना के बाद, सिम कार्ड जारी करने में लापरवाही, एक व्यक्ति को कई सिम जारी करने और अन्य मुद्दों से निपटा जाएगा। आइ4सी ने सूचित किया कि पीडि़तों के पैसे की तुरंत फ्रीजिंग, डी-फ्रीजिंग, वसूली के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं पर विचार किया जा रहा है।

हेल्पलाइन के पुनर्गठन पर विचार

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के पुनर्गठन पर भी विचार किया जा रहा है। समिति ने अमिकस क्यूरी के सुझाव पर पीडि़तों के मुआवजे पर भी विचार किया और सहमति जताई कि जब नुकसान लापरवाही के कारण हो या सेवा में कमी या बैंकों या दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की ओर से धोखाधड़ी हो तो ऐसी राहत दी जा सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button