अपराध

झांसा देकर पलवल के ठेकेदार से 5.37 करोड़ की ठगी, चंडीगढ़ की कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप

पलवल के स्थानीय ठेकेदार नवीन डागर के साथ चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी और उसके निदेशकों ने 5.37 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। कंपनी ने दमन और दीव में सरकारी प्रोजेक्ट का मुख्य ठेकेदार होने का दावा किया। नवीन ने काम पूरा किया, लेकिन उसे पूरा भुगतान नहीं मिला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 जिले के स्थानीय निर्माण ठेकेदार के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित ठेकेदार ने चंडीगढ़ स्थित एक निजी कंपनी और उसके निदेशकों पर 5.37 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाते हुए पलवल को शिकायत दी है।

पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामले में धतीर के रहने वाले शिकायतकर्ता नवीन डागर के अनुसार, चंडीगढ़ की कंपनी ‘मैसर्स गर्ग संस एस्टेट प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशकों राहुल गर्ग, अशोक कुमार गर्ग और नितिन गर्ग ने खुद को केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव के लोक निर्माण विभाग का मुख्य ठेकेदार बताया था।

उन्होंने दावा किया कि उनके पास दीव में 40 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग-251 के चौड़ीकरण और सुधारिकर्ण का मुख्य सरकारी प्रोजेक्ट है।

झूठे दस्तावेज पर प्रोजेक्ट का काम करवाने का आरोप

नवीन डागर का आरोप है कि कंपनी के निदेशकों ने झूठे दस्तावेज और तथ्यों के आधार पर उन्हें प्रोजेक्ट का काम करने के लिए प्रेरित किया। उनके झांसे में आकर नवीन ने अप्रैल 2024 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और दीव स्थित प्रोजेक्ट साइट पर अपना पैसा और संसाधन लगाकर काम शुरू कर दिया।

मार्च 2025 तक ठेकादार ने लगभग 2.97 करोड़ रुपये का काम पूरा कर लिया था, लेकिन कंपनी ने केवल एक करोड़ रुपये के आसपास ही भुगतान किया। जब भुगतान मांगा गया, तो आरोपिटों ने वित्तीय तंगी का बहाना बनाया और नए सरकारी टेंडरों का लालच देकर काम जारी रखने का दबाव बनाया।

जुलाई 2025 तक यह बकाया राशि बढ़कर 5,37,52,368 रुपये हो गई।

पैसे हड़पने का आरोप

शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि नवीन डागर को बाद में पता चला कि आरोपितों ने सरकारी विभाग से अपने हिस्से का पूरा भुगतान पहले ही प्राप्त कर लिया था। नवीन का आरोप है कि आरोपितों ने उस पैसे को उन्हें देने के बजाय हड़प लिया और धोखाधड़ी की।

नवीन डागर ने बताया कि पलवल में आरोपितों के प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर 10-15 दिन में भुगतान का वादा किया था, लेकिन तब से वे उनके फोन और संदेशों का जवाब नहीं दे रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि कंपनी की मंशा शुरू से ही धोखाधड़ी करने की थी।

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